गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो!

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                  *🥀 गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो!🥀*


          
                 *पोस्ट नम्बर:- 5*
                    
👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:-👇🏻👇🏻

                     *हाय, तुझे चाहेंगे,*
                  *अपना ख़ुदा बनायेंगे!*

                     *(म'आज़ अल्लाह)*

इसमें भी मख़्लूक़ को ख़ुदा बनाने की बात की गई है जो कि कुफ़्र है!

        👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:-👇🏻👇🏻

  *दिलों में हो तुम, आँखों में तुम, बोलो तुम्हें कैसे चाहूँ?*

  *पूजा करूँ या सज्दा करूँ? जैसे कहो वैसे चाहूँ!*

                     *(म'आज़ अल्लाह)*

   इस में भी मख़्लूक़ को पूजने की बात है जो कि कुफ़्र है। किसी को चाहने का क्या यही मतलब है कि आप उसे ख़ुदा बना लें और उस को सज्दा करना शुरू कर दें? *ये गाने आप को किस राह पर ले कर जा रहे हैं, ज़रा गौर करें!*

         👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:-👇🏻👇🏻

       *सज़ा रब जो देगा वो मन्जूर हम को,*
       *कि अब हम तुम्हारी इबादत करेंगे!*

                     *(म'आज़ अल्लाह)*

 इस शेर में *अल्लाह* के अज़ाब को हल्का समझा जा रहा है कि जो भी सज़ा मिलेगी वो हमें मंजूर है और फिर ग़ैरे ख़ुदा की इबादत का इरादा भी जाहिर किया जा रहा है!
_क्या इन्सानी जिस्म में ये ताक़त है कि वो अल्लाह के अज़ाब को दावत दे फिर क्या ये जुमला ज़ाहिर नहीं करता कि अज़ाबे इलाही को हल्का समझा जा रहा है। *अल्लाह* का खौफ़ करें और गाने बजाने से तौबा करें!_

        👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है :-👇🏻👇🏻

  *या रब तूने दिल तोड़ा मेरा किस मौसम में?*

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

    इस शेर में अल्लाह तआ़ला पर एतराज़ किया गया है जो कि कुफ़्र है!

        👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:-👇🏻👇🏻

*कैसे कैसों को दिया है, ऐसों वैसों को दिया है,*
*अब तो छप्पड़ फाड़ मौला, अपनी जेबें झाड़ मौला!*

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

इस शेर में भी अल्लाह तआ़ला पर एतराज़ किया गया है कि तूने कैसे कैसों को दिया है और जेबें झाड़ने का लफ़्ज़ अल्लाह तआ़ला के लिये ऐसा अक़ीदा रखना भी कुफ्र है।

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

        👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:-👇🏻👇🏻

         *बेचैनियाँ समेट के सारे जहान की,*
*जब कुछ ना बन सका तो मेरा दिल बना दिया!*

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

   इस शेर में जो अलफाज़ है *"जब कुछ ना बन सका तो मेरा दिल बना दिया"* इस से अल्लाह तआ़ला को बेबस क़रार दिया गया है जो कि ख़ुला कुफ़्र है। *क्या लोगों की मत मारी गयी कि ऐसे गानों को सुनते हैं और फिर इतना ही नहीं, शादियों, पार्टियों में बजाते भी हैं!*

        👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:-👇🏻👇🏻

  *दुनिया बनाने वाले! दुनिया में आकर दिखा*
     *सदमे सहे जो मैंने तू भी उठा कर देख!*

                    *(म'आज़ अल्लाह)*

  इस शेर में भी कुफ़्र है, यह अल्लाह तआ़ला की तौहीन है! मुसलमानों तुम्हारी ग़ैरत को क्या हो गया है *?* क्यों तुम अब भी गाने सुनते हो *?*

*📘 (गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो, सफ़ह- 5/6)*

*📍नोट:⇏ये ख़्याल रहे कि अगर लोगों की इस्लाह करना मक़सद ना होता तो अभी हम इन गंदे गानों को बयान नहीं करते, लेकिन चूँकि हम चाहते हैं कि मुसलमानों को हक़ीक़त पता चले, इसलिये हम यहाँ गानों के कुफ़्रिया अशआर की निशान देही कर रहे हैं!*

*📍नोट:⇏आप सभी हमारी इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करने की कोशिश करें, और याद रहे पोस्ट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बिल्कुल भी न करें..!*
    
*इंशा अल्लाह पोस्ट ज़ारी रहेगी*



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