गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो!गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो!
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*🥀गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो!🥀*
*पोस्ट नम्बर:- 1*
❖ अल्लाह तआ़ला का हम पर बहुत बड़ा एहसान है कि उसने हमें सबसे बेहतरीन उम्मत में पैदा फ़रमाया और अपने प्यारे नबी ﷺ को हमारे बीच भेजा, *ताकि हम अन्धेरों से निकल कर रौशनी में आ जाएं, नफ़रत का घर गिरा कर मुहब्बत का महल बनायें, बुराईयों को छोड़कर अच्छाइयों को गले लगायें, और हमारी किसी से दोस्ती या दुश्मनी सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल के लिये हो।*
❖ हमारे नबी ﷺ जब इस दुनिया में तशरीफ़ लाये तो हर तरफ़ बुराई, जुल्म और दहशत का अन्धेरा छाया हुआ था, लोगों के अक़ाइद, नज़रियात, और आमाल का बहुत बुरा हाल था और उन्हें सीधे रास्ते पर लाना, बुराई और अच्छाई की पहचान सिखाना, ज़िन्दगी का असल मक़सद बताना कोई आसान काम ना था *लेकिन बहुत ही क़लील वक़्त में आप ﷺ ने तमाम लोगों को एक इस्लाम की रस्सी थमाई और ऐसी मिसाल क़ाइम फ़रमाई कि इसकी नज़ीर देखना तो दूर की बात कोई अल्फ़ाज़ के ज़रिये इसकी तारीफ़ बयान भी नहीं कर सकता!*
❖ हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ का मुबारक ज़माना बहुत अच्छा और ख़ैर वाला था, इसके बाद सहाबा का ज़माना भी ऐसा ही रहा, लेकिन जैसे-जैसे वक़्त गुज़रता गया, हुज़ूर ﷺ के ज़माने से दूर होता गया, *जिहालत बढ़ने लगी और कई फ़ितनों ने सर उठाना शुरू किया,* हत्ता कि मौजूदा दौर हमारी नज़रों के सामने है जिसमें हम हर दिन नये-नये फ़ितनों को देख रहे हैं!
*दीगर कई फ़ितनों की तरह एक यह भी है कि हमारे मुआ़शरे में बेशुमार चीजें ऐसी आ गई हैं जो ग़ैरों की हैं और अफ़सोस की बात यह है कि हम ऐसी चीजों को पसन्द भी कर रहे हैं!*
❖ यहूदियों, नसरानियों, हिन्दुओं और अंग्रेज़ों के बीच रहकर मुसलमानों पर उनका काफ़ी असर हुआ है। *जी हाँ! जब से मुसलमानों ने उनकी सोहबत इख़्तियार की है तब से हमारे चाल चलन में कसीर तब्दीलियां हुई हैं!*
खाने का तरीक़ा, सोने का तरीक़ा, कज़ाए हाजत का तरीक़ा, शादियों का तरीक़ा, हमारे लिबास, घर, खाने, यहाँ तक कि चेहरों की सजावट भी ग़ैरों की तर्ज़ पर है! *(अल्लाह रहम फ़रमाए)*
❖ मुसलमानों की एक बड़ी तादाद गाने बजाने जैसी ख़तरनाक बला के चपेट में है। मुलसमानों ने गाने बजाने को इस क़दर अपने बीच शामिल कर रखा है जैसे मानो अपना साथी बना लिया हो, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि यह साथी उन्हें कहाँ लेकर जा छोड़ेगा।
*बहुत अफ़सोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि बहुत लोग अब गाने बजाने को बुरा ही नहीं समझते। शादी हो या वलीमा, अक़ीक़ा हो या मेंहदी की रस्म, ख़तना हो या और कोई महफ़िल, -
*गाने बजाने के बिना तो मुकम्मल ही नहीं होती, और अगर कोई इसे छोड़ दे तो जाहिलों की तरफ़ से अजीब अजीब ताने दिये जाते हैं जिसे हम सब अच्छी तरह जानते हैं लिहाज़ा बताने की ज़रूरत नहीं!*
❖ हमारे मुस्लिम मुआशरे में कई जगह तो यह देखा गया और सुनने को मिला कि *जो बारात में बाजा लेकर नहीं आता उसकी बारात में यह तक कह दिया जाता कि वोह सुन्नी नहीं है! क्या सुन्नियत की पहचान अब गाना बजाना रह गया है?*
हम इस नियत से कि हमारे मुसलमान भाइयों की इस्लाह हो जाये और उनके दिल में हमारी बात उतर जाये, *गाने बजाने के नुकसानात बयान कर रहे हैं* लिहाज़ा गुज़ारिश है कि क़ुरआन व सुन्नत के फ़रामीन मुलाहिज़ा फ़रमायें और *अल्लाह तआ़ला से दुआ करें कि वोह इस गुनाह से बचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाये!*
*📍नोट:⇏आप सभी हमारी इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करने की कोशिश करें,* *और याद रहे पोस्ट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बिल्कुल भी न करें..!*
*इंशा अल्लाह पोस्ट ज़ारी रहेगी*
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