गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो!

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                  *🥀 गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो🥀*


        
         *पोस्ट नम्बर:- 3*
                    
*❖* गाने बजाने के और बहुत सारे नुक़सानात हैं, जिन में से चंद हम ने बयान किये और *अहले अक़्ल (अक्ल वालो) के लिये इतना ही काफ़ी है* और ख़ुलासा यही है कि *गाना बजाना हराम है और जहन्नम में ले जाने वाला अमल है जिस से हमें बचना चाहिये!*
   _एक और ज़रूरी बात हम अर्ज़ करना चाहते हैं कि आज कल जो गाने सुने जाते हैं वो आप के ईमान को भी बरबाद कर सकते हैं! मुसलमानों के लिये ग़ौर का मक़ाम हैं कहीं ऐसा ना हो कि ये गाने तुम्हें काफिर बना दें!_
                  _*(मआज़ अल्लाह)*_

  *🚨 अक्सर फ़िल्मी गानों में ऐसे अश्आर होते हैं जिन्हें गुनगुनाने या पढ़ने से इन्सान काफ़िर हो जाता है! सारे नेक अमल बर्बाद हो जाते हैं, बीवी से निकाह टूट जाता है, और हमेशा के लिये जहन्नम का मुश्तहिक़ हो जाता है! अगर बिना तौबा किये मर जाये तो काफ़िर की मौत मरता है।* 
*(म'आज़ अल्लाह)* 
ऐसा इसलिये होता है कि गानों में कुफ़्रिया कलिमात होते हैं और बाज़ तो ऐसे होते हैं कि जिसे "सरीह कुफ़्र" कहा जाता है यानी अगर आप ने वो अश्आर पढ़े और अगरचे आप की नियत और अक़ीदा उस शेर के मुताबिक़ ना भी हो तो भी आप काफ़िर हो जायेंगे। हम आप के सामने कुछ मिसालें पेश करते हैं ताकि आसानी से समझ आ जाये!

      👇🏻👇🏻एक गाने में ये कुफ़्रिया शेर है: 👇🏻👇🏻

      *हसीनों को आते हैं क्या क्या बहाने,*
      *ख़ुदा भी ना जाने तो हम कैसे जानें?*
                    *(म'आज़ अल्लाह)*

_👉🏻 इस शेर में साफ़ कहा जा रहा है कि *म'आज़ अल्लाह* "ख़ुदा भी ना जाने तो हम कैसे जानें" *ये जुमला कुफ़्र पर मबनी है क्योंकि इस से अल्लाह के इल्म का इंकार साबित होता है।* हालाँकि अल्लाह तआ़ला दिलों के वो हाल तक जानता है जिसे इन्सान ख़ुद अच्छी तरह नहीं जानता। *मुसलमानों!* गौर करो कि किस तरह तुम अपनी जुबान से ख़ुशी ख़ुशी अल्लाह की तौहीन कर रहे हो!_

  *❖ ऐसे अश्आर गाने से या गुनगुनाने से इन्सान काफ़िर हो जाता है, उस की बीवी निकाह से निकल जाती है, और जितने नेक आमाल किये थे सब बर्बाद हो जाते हैं यानी कोई नेकी नहीं बचती!*
    _ये ख़्याल रहे कि अगर लोगों की इस्लाह करना मक़सद ना होता तो अभी हम इन गंदे गानों को बयान नहीं करते, लेकिन चूँकि हम चाहते हैं कि मुसलमानों को हक़ीक़त पता चले, इसलिये हम यहाँ गानों के कुफ़्रिया अशआर की निशान देही कर रहे हैं!_

      👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:- 👇🏻

  *जितनी प्यारी आँखें हैं, आँखों से झलकता प्यार*
*क़ुदरत ने बनाया होगा फ़ुरसत से तुझे मेरे यार*
                     _*(म'आज़ अल्लाह)*_

    _अल्लाह त'आ़ला मसरूफ़ (Busy) नहीं रहता कि उसे किसी काम को फ़ुरसत निकाल कर करना पड़े। इस का एक ये मतलब भी निकलता है कि अल्लाह तआ़ला ने जिसे फ़ुरसत से बनाया वो ख़ूबसूरत है और जिसे जल्दी में बनाया वो बदसूरत है!_
               _*(अस्तग़्फ़िरुल्लाह)*_

     👇🏻👇🏻एक गाने में ये शेर है:- 👇🏻👇🏻

  *फूलों सा चेहरा तेरा, कलियों सी मुस्कान है,*

*रंग तेरा देखकर, रूप तेरा देख के क़ुदरत भी हैरान है।*
                 _*(म'आज़ अल्लाह)*_

         इस शेर में भी अल्लाह तआ़ला के लिये वो अलफाज़ इस्तेमाल किये गये जो उस की शान के लाइक़ नहीं। "क़ुदरत भी हैरान है" इससे ये समझ में आता है कि उसे किसी और ने बनाया है इसीलिये क़ुदरत हैरान है! *अल्लाह तआ़ला हमें ऐसे अश्आर सुनने से बचाये!*

 *📘 {गाना बजाना बन्द करो तुम मुसलमान हो, सफ़ह- 3}*

*📍नोट:⇏आप सभी हमारी इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करने की कोशिश करें, याद रहे पोस्ट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बिल्कुल भी न करें..!*
    
*इंशा अल्लाह पोस्ट ज़ारी रहेगी*



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